सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट कम कर नामांकन बढ़ाने की तैयारी
747 करोड़ रुपए के बजट से सरकार देगी बच्चों को पौष्टिक भोजन

सत्य खबर हरियाणा
Government Scheme : हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी शिक्षा के स्तर को ऊपर उठने के लिए अहम कदम उठाए हैं। इस दिशा में सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत 747 करोड रुपए के बजट को स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्यस्तरीय संचालन एवं निगरानी समिति की बैठक में इस योजना को लेकर इस बात का भी दावा किया गया कि इससे बच्चों को नए केवल पौष्टिक भोजन मिलेगा बल्कि सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट कम कर बच्चों के नामांकन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
योजना के अनुसार 747 करोड रुपए में से 222 करोड रुपए केंद्र सरकार बहन करेगी जबकि बाकी 525 करोड रुपए की राशि राज्य सरकार द्वारा वहां की जाएगी। इस योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस योजना को जमीनी स्तर पर मजबूती के साथ लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। बैठक में योजना को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की रणनीति भी तैयार की गई है।
इस मामले में मौलिक शिक्षा निदेशक मान्यता मलिक का कहना है कि यह योजना बाल वाटिका से लेकर उच्च प्राथमिक कक्षाओं तक के करीब 15 लाख छात्र-छात्राओं के लिए तैयार की गई है। इस योजना में बच्चों को केवल भोजन उपलब्ध करवाना ही शामिल नहीं किया गया है बल्कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को गति देना है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार दर्ज होने की उम्मीद है।
गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता
योजना की सफलता इसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण के मानकों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला और स्कूल स्तर पर निगरानी तंत्र को और सख्त किया जाएगा। नियमित निरीक्षण के जरिए पूरी व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाएगी।
स्वाद और सेहत का रखा जाएगा ध्यान
बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी पसंद का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि भोजन न केवल पौष्टिक होना चाहिए, बल्कि बच्चों के स्वाद के अनुरूप भी होना चाहिए ताकि वे इसे खुशी से ग्रहण करें। इसके लिए मेन्यू में दूध, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ, मूंगफली की पिन्नी और खीर जैसे पौष्टिक विकल्प शामिल किए गए हैं। भोजन बच्चों को पसंद आ रहा है या नहीं, इसके लिए सीधे विद्यार्थियों से नियमित फीडबैक लेने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य का सीधा कनेक्शन
बेहतर पोषण का सीधा असर बच्चों की सीखने की क्षमता पर पड़ता है। यह योजना लंबे समय से स्कूली बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के साथ-साथ ड्रॉपआउट दर कम करने में अहम भूमिका निभा रही है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि जब बच्चों को स्कूल में भरपेट और पौष्टिक भोजन मिलेगा, तो उनकी पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी और शिक्षा के प्रति रुझान भी सकारात्मक होगा।
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